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भारत ने कहा है कि वह खालिस्तान समर्थन को लेकर चिंतित है, लेकिन यह एक आंतरिक मामला है और भारत इसे अपने तरीके से हल करेगा।

नई दिल्ली, 9 अक्टूबर (भाषा) – कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने हाल ही में इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष के बारे में बात करते हुए भारत का नाम लिया। उन्होंने कहा कि इजरायल के रक्षा के अधिकारों का समर्थन करते हैं और कानून के शासन को बनाए रखने और उसका सम्मान करने के महत्व पर भी जोर दिया।

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इसके अलावा, उन्होंने भारत में खालिस्तान समर्थन को लेकर भी चिंता व्यक्त की। ट्रूडो ने कहा कि कनाडा भारत के साथ खालिस्तान समर्थन को लेकर चिंतित है। उन्होंने कहा कि हम भारत के साथ काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि खालिस्तान समर्थन को कोई जगह न मिले।

ट्रूडो ने UAE के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद से भी फोन पर बात की। इस बातचीत में उन्होंने इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष के बारे में भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि हम इजरायल के रक्षा के अधिकारों का समर्थन करते हैं और हम इस संघर्ष का शांतिपूर्ण समाधान चाहते हैं।

भारत का जवाब

भारत ने ट्रूडो के बयानों को लेकर नाराजगी व्यक्त की है। भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि ट्रूडो के बयान भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप हैं। मंत्रालय ने कहा है कि भारत एक लोकतंत्र है और यहां हर किसी को अपनी राय रखने का अधिकार है।

भारत ने कहा है कि वह खालिस्तान समर्थन को लेकर चिंतित है, लेकिन यह एक आंतरिक मामला है और भारत इसे अपने तरीके से हल करेगा।

विपक्ष का आरोप

भारतीय विपक्ष ने भी ट्रूडो के बयानों को लेकर मोदी सरकार पर हमला किया है। कांग्रेस ने कहा है कि मोदी सरकार ने ट्रूडो को भारत में घुसने दिया है। कांग्रेस ने कहा है कि मोदी सरकार ने ट्रूडो को भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने का मौका दिया है।

निष्कर्ष

ट्रूडो के बयानों से भारत और कनाडा के बीच तनाव बढ़ सकता है। यह भी देखा जाना होगा कि भारत इस मामले में आगे क्या कदम उठाता है।

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