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सरकार से जुड़े नेताओं ने एक के बाद एक माफ़ी मांगी. लेकिन, जब विवाद नहीं थमा तो अब जस्टिन ट्रूडो ने भी माफ़ी मांगी है.

कनाडा (Canada) के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो (Justin Trudeau) अपनी एक हरकत के चलते फिर दिक्कत में आ गए. अब जो कांड किया उसके लिए माफ़ी मांगी है और वो भी गहरी माफ़ी. जस्टिन ट्रूडो ने भारत के बाद अपनी संसद में कुछ ऐसा किया जिससे उनका पंगा यहूदियों के साथ भी हो गया. हर तरफ निंदा भी हो रही है. उनके साथ यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की (Volodymyr Zelenskyy) को भी घेरा जा रहा है. चलिए पहले आपको बता ही देते हैं कि हुआ क्या था. दरअसल 22 सितंबर को कनाडा की संसद में नाजी आर्मी के एक सदस्य को सम्मानित किया गया था. जेलेंस्की ने उन्हें हीरो बताया. ट्रूडो समेत संसद में मौजूद सभी लोगों ने उनके सम्मान में खड़े होकर तालियां बजाईं. इसी बात पर विवाद हो गया.

सरकार से जुड़े नेताओं ने एक के बाद एक माफ़ी मांगी. लेकिन, जब विवाद नहीं थमा तो अब जस्टिन ट्रूडो ने भी माफ़ी मांगी है. कनाडा के पीएम ने घटना पर माफ़ी मांगते हुए मीडिया से कहा, ‘यह अत्यंत दुखद है कि ऐसा हुआ. कनाडा की संसद में जो हुआ वो संसद के लिए और सभी कनाडाई लोगों के लिए बेहद शर्मनाक बात है.’

22 सितंबर की बात है. यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की कनाडा दौरे पर आए. उन्होंने कनाडाई संसद को संबोधित किया और लगातार समर्थन देने के लिए कनाडा को धन्यवाद दिया. इसी दौरान रूसियों के खिलाफ लड़ने के लिए नाजी आर्मी के सदस्य यारोस्लाव हंक को एक हीरो के रूप में सम्मानित किया गया. 98 साल के यारोस्लाव हंक ने वेफेन एसएस के 14वें डिवीजन के लिए लड़ाई लड़ी थी. संसद में उनको स्टैंडिंग ओवेशन दिया गया.

‘माफ़ी मांगिए आपने ब्लंडर कर दिया’ 

कनाडा की विपक्षी पार्टियों ने इस मामले पर ट्रूडो से माफी मांगने की मांग की. मुख्य विपक्षी नेता पियरे पोइलिवरे ने जस्टिन ट्रूडो की आलोचना करते हुए पोस्ट किया,

‘जस्टिन ट्रूडो ने व्यक्तिगत रूप से SS (नाजी डिवीजन) के 14वें वेफेन ग्रेनेडियर डिवीजन के अनुभवी से मुलाकात की और उन्हें सम्मानित किया. जेलेंस्की की कनाडा यात्रा के दौरान हाउस ऑफ कॉमन्स में नाजी दिग्गज को सम्मानित किया गया.’

उन्होंने आगे लिखा,

‘ये जस्टिन ट्रूडो के जजमेंट में भयानक गड़बड़ी का मामला है. उनके अपने ऑफिस के लोग मेहमानों और इस तरह की यात्राओं के अरेंजमेंट के लिए जिम्मेदार होते हैं. हाउस ऑफ कॉमन्स में बुलाने और सम्मानित करने से पहले किसी भी सांसद को इस शख्स के अतीत के बारे में जानकारी नहीं थी. ट्रूडो को व्यक्तिगत रूप से माफी मांगनी चाहिए और हर बार की तरह दूसरों पर दोष मढ़ने से बचना चाहिए.’

कनाडा के मानवाधिकार समूह संगठन फ्रेंड्स ऑफ साइमन विसेन्थल सेंटर (FSWC) ने भी इस मामले पर एक पोस्ट किया. पोस्ट में लिखा,

‘FSWC इस बात से हैरान है कि कनाडा की संसद ने एक यूक्रेनी दिग्गज को स्टैंडिंग ओवेशन दिया जिसने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान यहूदियों और अन्य लोगों की सामूहिक हत्या में नाजी सैन्य इकाई में काम किया था.’

इस घटना के कुछ ही घंटे बाद कनाडा के हाउस ऑफ कॉमन्स के अध्यक्ष एंथनी रोटा ने एक बयान जारी कर माफी मांगी.

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