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हाई कोर्ट ने यह फैसला एक व्यक्ति की अपील पर दिया, जिस पर नाबालिग के साथ संबंध बनाने का आरोप लगाया गया था। व्यक्ति ने अपनी बच्ची की कस्टडी के लिए अदालत से अपील की थी।

बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक फैसले में कहा है कि एक व्यक्ति, जो नाबालिग के साथ संबंध बनाने के आरोपी है, अपने बच्चे की कस्टडी का दावा कर सकता है। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में जहां बच्चे का जन्म एक गैर-कानूनी संबंध के परिणामस्वरूप हुआ है, अदालत बच्चे के सर्वोत्तम हित को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेगी।

हाई कोर्ट ने यह फैसला एक व्यक्ति की अपील पर दिया, जिस पर नाबालिग के साथ संबंध बनाने का आरोप लगाया गया था। व्यक्ति ने अपनी बच्ची की कस्टडी के लिए अदालत से अपील की थी।

अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में जहां बच्चे का जन्म एक गैर-कानूनी संबंध के परिणामस्वरूप हुआ है, अदालत बच्चे के सर्वोत्तम हित को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेगी। अदालत ने कहा कि बच्चे को उसके माता-पिता से अलग करना उसके सर्वोत्तम हित में नहीं हो सकता है, भले ही उनमें से एक को अपराध का दोषी ठहराया गया हो।

अदालत ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में जहां बच्चे के माता-पिता दोनों ही अपराध के दोषी ठहराए गए हैं, अदालत बच्चे को उसके अन्य रिश्तेदारों की देखभाल में दे सकती है।

बॉम्बे हाई कोर्ट का यह फैसला एक महत्वपूर्ण फैसला है। यह फैसला उन बच्चों के अधिकारों की रक्षा करता है जो गैर-कानूनी संबंधों के परिणामस्वरूप पैदा होते हैं। यह फैसला यह भी स्पष्ट करता है कि ऐसे मामलों में अदालत बच्चे के सर्वोत्तम हित को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेगी।

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