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सोमनाथ ने कहा कि अंतरिक्ष की यात्रा के लिए प्रति टिकट की लागत लगभग 6 करोड़ होने की संभावना है। उन्होंने यह भी कहा कि यात्रा करने वाले लोग खुद को अंतरिक्ष यात्री कह सकेंगे।

नई दिल्ली: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने 2030 तक 6 करोड़ रुपये प्रति यात्री की लागत से स्पेस टूरिज्म शुरू करने की योजना बनाई है। इसरो के चेयरमैन एस सोमनाथ ने बताया कि इसरो अपने स्वयं के स्पेस टूरिज्म मॉड्यूल पर तेजी से काम कर रहा है।

सोमनाथ ने कहा कि अंतरिक्ष की यात्रा के लिए प्रति टिकट की लागत लगभग 6 करोड़ होने की संभावना है। उन्होंने यह भी कहा कि यात्रा करने वाले लोग खुद को अंतरिक्ष यात्री कह सकेंगे।

हालांकि, सोमनाथ ने अभी यह साफ नहीं किया है कि अंतरिक्ष पर्यटन उप-कक्षीय होगा या कक्षीय। उप-कक्षीय अंतरिक्ष पर्यटन में यात्री अंतरिक्ष के किनारे पर लगभग 15 मिनट बिताते हैं, जबकि कक्षीय अंतरिक्ष पर्यटन में यात्री पृथ्वी की परिक्रमा करते हैं।

ISRO ने भारत के उप-कक्षीय अंतरिक्ष पर्यटन के लिए व्यवहार्यता अध्ययन करना शुरू कर दिया है। यदि अध्ययन सफल होता है, तो ISRO स्पेस टूरिज्म मॉड्यूल विकसित करेगा और निजी कंपनियों के साथ साझेदारी में स्पेस टूरिज्म सेवाएं प्रदान करेगा।

स्पेस टूरिज्म एक उभरता हुआ उद्योग है और इसमें काफी संभावनाएं हैं। कई निजी कंपनियां स्पेस टूरिज्म सेवाएं प्रदान करने के लिए काम कर रही हैं। हालांकि, स्पेस टूरिज्म अभी भी बहुत महंगा है।

ISRO की स्पेस टूरिज्म योजना भारत के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। यह भारत को स्पेस टूरिज्म के वैश्विक बाजार में प्रवेश करने में मदद करेगा और इस उद्योग में एक प्रमुख खिलाड़ी बनने में मदद करेगा।

स्पेस टूरिज्म के लाभ

स्पेस टूरिज्म के कई लाभ हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • अंतरिक्ष अनुसंधान और विकास के लिए धन जुटाने में मदद कर सकता है।
  • अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में निवेश को बढ़ावा दे सकता है।
  • यह नए रोजगार पैदा कर सकता है।
  • भारत की वैश्विक छवि को बढ़ा सकता है।

स्पेस टूरिज्म की चुनौतियां

स्पेस टूरिज्म की कुछ चुनौतियां भी हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • यह बहुत महंगा है।
  • यह जोखिम भरा है।
  • इसके लिए पर्याप्त बुनियादी ढांचे की आवश्यकता होती है।

हालांकि, ISRO इन चुनौतियों को दूर करने और भारत में स्पेस टूरिज्म को सफल बनाने के लिए काम कर रहा है।

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