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NewsClick छापों में दिल्ली पुलिस द्वारा पत्रकारों के पासवर्ड और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त करना पत्रकारों की गोपनीयता का उल्लंघन है। यह घटना स्वतंत्र पत्रकारिता के लिए एक खतरा है।

हाल ही में, दिल्ली पुलिस ने न्यूज़क्लिक के पत्रकारों के घरों पर छापेमारी की और उनके मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य डिजिटल उपकरण जब्त कर लिए। इस घटना ने पत्रकारों के पासवर्ड और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण साझा करने के लिए मजबूर करने की कानूनी स्थिति पर बहस छेड़ दी है।

क्या पत्रकार पासवर्ड और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण साझा करने के लिए मजबूर किए जा सकते हैं?

भारतीय कानून में पत्रकारों के पासवर्ड और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण साझा करने के लिए मजबूर करने के संबंध में कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं हैं। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने कुछ मामलों में कहा है कि पत्रकारों के पासवर्ड और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की गोपनीयता कानून द्वारा संरक्षित है।

सुप्रीम कोर्ट ने 2013 में पीयूसीएल मामले में कहा था कि पत्रकारों के पासवर्ड और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की गोपनीयता को केवल तभी उल्लंघन किया जा सकता है जब राज्य के पास यह साबित करने के लिए ठोस सबूत हों कि पत्रकार किसी अपराध में शामिल हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में रोमेश थापर मामले में भी पत्रकारों के पासवर्ड और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की गोपनीयता पर जोर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि पत्रकारों के पासवर्ड और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की गोपनीयता को केवल तभी उल्लंघन किया जा सकता है जब राज्य के पास यह साबित करने के लिए ठोस सबूत हों कि पत्रकार राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा पैदा कर रहे हैं।

NewsClick छापों पर विशेषज्ञों की राय

विशेषज्ञों का मानना ​​है कि NewsClick छापे में दिल्ली पुलिस द्वारा पत्रकारों के पासवर्ड और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त करना पत्रकारों की गोपनीयता का उल्लंघन है।

मीडिया वकील प्रवीण स्वामी ने कहा कि दिल्ली पुलिस द्वारा न्यूज़क्लिक पत्रकारों के पासवर्ड और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त करना पत्रकारों के अधिकारों का उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि राज्य के पास पत्रकारों के पासवर्ड और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को जब्त करने का कोई आधार नहीं था।

डिजिटल सुरक्षा विशेषज्ञ अमित शुक्ला ने कहा कि दिल्ली पुलिस द्वारा न्यूज़क्लिक पत्रकारों के पासवर्ड और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त करना एक चिंताजनक घटना है। उन्होंने कहा कि इससे पत्रकारों के लिए अपने स्रोतों को सुरक्षित रखना मुश्किल होगा और इससे स्वतंत्र पत्रकारिता को खतरा पैदा होगा।

निष्कर्ष

भारतीय कानून में पत्रकारों के पासवर्ड और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण साझा करने के लिए मजबूर करने के संबंध में कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं हैं। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने कुछ मामलों में कहा है कि पत्रकारों के पासवर्ड और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की गोपनीयता कानून द्वारा संरक्षित है।

NewsClick छापों में दिल्ली पुलिस द्वारा पत्रकारों के पासवर्ड और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त करना पत्रकारों की गोपनीयता का उल्लंघन है। यह घटना स्वतंत्र पत्रकारिता के लिए एक खतरा है।

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